
Purvi Nagar
चेतना अहंकार और उसके विषय से मिलकर बनती है, चेतना कोई स्वतंत्र इकाई नहीं है जिसे जाना जा सके, चेतना माध्यम है जानने का चेतना को नहीं जाना जा सकता। विज्ञान के अनुसार चेतना कोई अलग सत्ता है जिसको जाना जा सकता है जबकि फ्रेमवर्क के अनुसार जानने वाले को ही जानना है। चेतना कोई स्वतंत्र इकाई नहीं विषय और विषयता दोनों का सम्मलित रूप ही चेतना का आधार है अगर विशेयता नहीं तो n कोई चेतना न कोई विषय















