
Talking Mirror
वैभव जी, जो सवाल आपने वहाँ सीधे रखे और जिनके जवाब से भ्रम दूर हुए, वो किताब पढ़कर या रिकॉर्डिंग देखकर उतनी स्पष्टता से शायद नहीं मिलते। यही फर्क है जो आप बाकियों को बता रहे हैं, कि समझ अकेले बैठकर उतनी नहीं खुलती जितनी किसी के सामने बैठकर, जवाबदेही के साथ। अब यह जो स्पष्टता मिली है, इसे वहीं मत छोड़िएगा। अगला सत्र हो या परीक्षा, जहाँ फिर से प्रश्न उठें वहाँ फिर उसी ईमानदारी से पूछिएगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचान…















