
Archana
जानने वालो ने, ज्ञानियों ने, ऋषियों ने या ग्रंथो ने हमें हमारी सारी पहचानो से मुक्त होना सिखाया हैं, उसमें अच्छी पहचान हो या बुरी, हिंसक पहचान हो या अहिंसक, जहाँ सारी पहचान मिटने लग जाती है वही से... इंसान का हित होना शुरू हो जाता हैं ज़ब तक कोई भी पहचान को हम अपना मानकर बैठे है.... तब तक हम दुख में हैं और रहेंगे ऐसा हो जाना जहाँ हमारे लिए विषय तो हो जीवन में लेकिन __ उस विषय का अर्थ, उस विषय से आसक्ति ना हो















