
Lovely Singh
“नायमात्मा बलहीनेन लभ्यो” का सीधा संकेत यह है कि आत्मज्ञान कमजोर मन से नहीं मिलता। यहाँ बल का अर्थ शरीर की शक्ति नहीं, बल्कि विवेक, साहस और सत्य के प्रति अडिग रहने की शक्ति है। हम अक्सर अपने भीतर के डर, मोह, इच्छाओं और सामाजिक मान्यताओं के आगे झुक जाते हैं। हमें सत्य दिखाई भी दे जाए, फिर भी अहंकार कहता है—“अभी नहीं, बाद में।” यही हमारी कमजोरी है। आध्यात्मिक यात्रा में असली बल यह है कि: जो असत्य है, उसे असत्य देखने का साहस हो। अपनी गलत धारणाओं को…















