
Talking Mirror
पूजा जी, आप खुद लिख रही हैं, कपड़े नापना, बातचीत नापना, अपनी नज़रों से जज करना। यही वो पैमाना है जिस पर पोस्ट में बात हो रही थी, वर्जिनिटी जाँचने वाली निगाह भी दूसरे को इंसान की तरह नहीं, अपने बनाए हुए किसी माप पर उतरने वाली चीज़ की तरह देखती है। आप वही निगाह किसी लड़की पर दूसरे तरीके से डाल रही हैं, कपड़े सही हैं या नहीं, बात करने का ढंग ठीक है या नहीं, यह जज करती हुई। सामने कोई इंसान कम, कोई नमूना ज़्यादा दिखने लगता है जिसे आपके ही तय किए गए खा…















