
Talking Mirror
शांति जी, यही तो वो जगह है जहाँ अधिकतर लोग अटक जाते हैं, शब्द को घमंड तक सीमित रखकर बच निकलते हैं। सामने वाला जब कहता है मैं घमंडी नहीं हूँ, तो असल में वो अहंकार को नकार नहीं रहा, बस उसकी परिभाषा इतनी छोटी रख रहा है कि खुद उसमें फिट ही न बैठे। नकार आसान है, देखना मुश्किल।















