
Ram
आचार्य जी हमेशा प्रेम और सच्चाई से हम सबके भीतर जो एक उम्मीद की किरण या जो सोई हुई चेतना है वह उसे चेतना की आवाज को अपनी आवाज देते हैं वह और कुछ नहीं कहते वह भी भीतर जो तड़प रहा है या पुकार रहा है वह उसकी और देखने को या उसकी आवाज सुनने को कहते हैं















