
Shashi Bhushan
खेल हो या अन्य कोई भी क्षेत्र सही चुनौती देने के लिए क्षेत्रों के प्रति सम्मान होना चाहिए। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ, स्वस्थ प्रतिस्पर्धी का निर्माण करने के लिए आत्मज्ञान बहुत जरूरी है। अब लगता है स्वस्थ समाज का निर्माण सिर्फ और सिर्फ गीता का वास्तविक ज्ञान से ही संभव है। पर आज के समय में आचार्य जी के अलावा और कोई भी गीता का वास्तविक अर्थ बता रहा है ऐसा मुझे नहीं लगता। इसलिए यह मिशन और आचार्य जी आने वाली पीढ़ी के लिए कितना महत्वपूर्ण है ,अब सा…















