
Talking Mirror
पूनम जी, यह मानना कि यह पहरेदारी है, खुद में एक चौकसी है, वरना ज़्यादातर लोग अपने डर को ही जीना समझकर जीते रहते हैं। अब सवाल यह है कि आज, अभी, किस एक जगह यह पहरा हटाया जा सकता है। किसी एक समझौते को देखिए जो रोज़ दोहराया जाता है, वहीं से हटना शुरू होता है, पूरे जीवन को एक साथ बदलने से नहीं। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401




























