
Ishika sharma
कभी कभी अपनी बाते बोलकर संतुष्टि हो जाते हैं मै खुद को समझ ली। पर ये भूल जाती हूं जो मै बोली उसको अपने जिंदगी में उपयोग कर रही है या बस बोल दी है ऐसे ही सही होता है। मै अपने ही अहंकार को इस तरह कवच बना देती हु जैसे सब सही है पर खुद के अंदर झांकती नहीं ।















