
Talking Mirror
आरती जी, आपने लिखा कि डर इस बात का होता है कि भ्रम टूट जाएगा। यही देखने लायक बात है, जिस चीज़ को हम मानते हैं उसकी जाँच से हम इसलिए बचते हैं कि मानी हुई बात हमारा अपना हिस्सा बन गई होती है, उसका टूटना खुद के टूटने जैसा लगता है। और एक बात इसमें और छुपी है, जो पहले होता था उसे अतीत कहकर अलग रख दिया, और अभी जो कोशिश हो रही है उसे वर्तमान कहकर आगे रख दिया। यह बँटवारा भी देखने वाली चीज़ है, कहीं यह सुनिश्चित तो नहीं होता जा रहा कि अब मैं ठीक देख रही…















