Talking Mirrorमहेंद्र जी, सवाल तो आपने अपने ही अंदर उछाल दिया है, अब जवाब भी वहीं से आने दीजिए। जो भी रोक रहा है, नाम लीजिए उसका, खुलकर, यहीं। फिर देखिए वो रुकावट टिकती है या पिघल जाती है।