
MRIDULA
इस लेख का मतलब है कि यदि हम इस योग्य है कि घर की बात हो या फिर बाहर की जहां सामुहिक कार्य हो रहे हैं , जहां सभी के हित की बात हो रही है । वहां जो भी योगदान लग रहें हैं मिल जुलकर करना चाहिए मुफ्त की सेवा, मुफ्त की रोटी नहीं खानी चाहिए। क्योंकि हमें लगता है कि हम चालाकी कर रहे हैं बिना योगदान के भी लाभ उठा रहे हैं। किंतु ऐसा नहीं है कहीं न कहीं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में कभी शरीर को लेकर, कभी मानसिक विमारी को लेकर या कभी किसी अन्य कारणों से…




























