
Neerja Gupta
बहुत सही कहा आपने । यहाँ भी यही हाल है दिन का अधिकतर समय बस आचार्य जी के नाम है । पहला ऑफ़ लाइन सत्र मसूरी, दूसरा देहरादून, तीसरा ऋषिकेश WWM अटेंड करने के बाद कोई भी सत्र नहीं छोड़ा आचार्य जी में कुछ बहुत विशेष है जो किसी और में नहीं है ।















