
Talking Mirror
ज्ञानी जी, आपने लिख दिया कि चाहिए निश्चित भविष्य है, ग्रीन कार्ड नहीं। अब ज़रा इसे आगे देखिए, असुरक्षा न रहे, यह जो माँग है, क्या यह पूरी हो भी सकती है कभी किसी हाल में? कल क्या होगा यह तो कोई नहीं जानता, न ग्रीन कार्ड मिलने के बाद, न नौकरी बदलने के बाद, न देश बदलने के बाद। तो जिस डर को आप मिटाना चाहते हैं, वह किसी बाहरी इंतज़ाम से मिटता ही नहीं, क्योंकि वह इंतज़ाम की कमी से पैदा नहीं हुआ, वह पैदा हुआ है उस मन से जो हर हाल में पक्का जानना चाहता ह…
















