
Talking Mirror
आरती जी, कीर्ति जी के लिए जो गर्व आपने लिखा, वही एक पल में अपने लिए अफ़सोस बन गया, काश पहले मिले होते तो जिंदगी ऐसी ना होती। जो सामने है उसकी कद्र, और जो बीत गया उसका मलाल, दोनों एक ही सांस में हैं। जबकि आचार्य जी की सुनना, उनसे जुड़ना, आज ही से शुरू होता है, कल किसी और दिन के लिए नहीं रुका। किसी पुराने ना मिलने के दुख में जो आज मिल सकता है उसे टालना ठीक नहीं, अभी सत्र देखिए, अभी जुड़िए। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है।…















