
rohit
में अपना डर हटाने के लिए सत्येंद्र नाथ को ही चुनता हु पर उसको चुनते वक्त में असमंजस में पड़ जाता हूं कि कही में अपने अहंकार के चलते तो ये फैसला नहीं ले रहा, क्योंकि दोनों तरफ की दलीलें सामने आ जाती हैं और दोनों सही लगती हैं तो में कन्फ्यूजन में आ जाता हु कि कही में अपनी सुविधा के अनुसार उन दलीलों में से एक तरफ की दलीलों और तथ्यों को रख कर तो निर्णय नहीं ले रहा















