
Deeksha lodhi
पहले मे भी प्रेम हे ये सोचती थी कि जिसका विचार हमारे मन में बार बार आ रहा हे शायद इसे ही प्रेम बोलते हे पर जब से मैने आचार्य जी को सुनना शुरू किया तब पता चला कि प्रेम होता क्या हे प्रेम जो आचार्य जी हम से करते है वो होता प्रेम बिना स्वार्थ के















