
अहंकार किसी को अपने आगे रहने ही नहीं देता हर जगह इसी की माया फैली हुई है l जैसे पूरी दुनिया ही इसी की हो l प्रकृति को बस kha जाने पर तुली है l और किसी जीव का कोई स्थान ही नहीं है हर जगह मनुष्य ही अपना अधिकार जमा के बैठा है l जबकि ये भी एक कीड़े की तरह भूमि पर गति कर रहा और कुछ नहीं लेकिन अहंकार ने इसे बड़ा होने का झूठा चोला पहना रखा है l क्या होगा....
















