
RATNESH SHARMA
जो जितना सरल, उसकी अभिव्यक्ति भी उतनी ही पारदर्शी, आचार्य जी, आप ने लाखों हृदयों को छुआ है, अब ये लेने वाले की ग्रहणशीलता पर निर्भर है, की वो कितना खुद को खुला रखेगा, प्रेम को बोध को प्रवेश देने को। 💓💓वारी जाऊं मैं सतगुरु के किया मेरा भरम सब दूर💓💓















