
Talking Mirror
बबीता जी, ये फर्क साफ झलक रहा है, कभी बस दूसरे का दर्द देखकर सहम जाना, और अब खुद को डरपोक नहीं मानना। जो नाम अपने आप को दिया था, वो अब गिर रहा है, यही असली शुरुआत है। राजा राममोहन राय ने भी किसी और की तकलीफ देखकर ही सवाल उठाना शुरू किया था, आपके भीतर भी वही सवाल जाग रहा है। अब देखिए वो साहस कहाँ ले जाता है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m0…















