
सब जैसा बनने की कोशिश में कहीं खुद को तो नहीं खो दिया? 🪞 | H.I.D.P. अनुभव!
“Normal” बनने की चाह अच्छी नौकरी, शादी, सामाजिक स्वीकृति और दूसरों जैसा जीवन… लेकिन क्या यही स्वतंत्रता है? H.I.D.P. के इस अनुभव में एक सहभागी साझा करते हैं कि कैसे एक नाटक और आचार्य जी की शिक्षाओं ने उन्हें अपने जीवन के उन बंधनों को देखने का अवसर दिया, जिन्हें हम अक्सर सामान्य मानकर स्वीकार कर लेते हैं। ✨ खुद को जानने की शुरुआत शायद यहीं से होती है।





















