हां कही न कही बिलकुल ऐसे ही प्रवृति दुनिया के साथ अलग अलग रूपो में दोहरा रहे है।जैसे भालू…
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Pramila rajwade
हां कही न कही बिलकुल ऐसे ही प्रवृति दुनिया के साथ अलग अलग रूपो में दोहरा रहे है।जैसे भालू के पित को दवा मानकर के उसपर जुलुम किया जा रहा ,वहीं चीज हम भी तो दोहरा रहे और किसी दूसरी चीज को ले कर के।