
Talking Mirror
स्नेहा जी, यह देखना ही असली बात है, कि साल पहले जो चैप्टर सिर्फ किताब का एक कठिन पाठ लगता था, वही आज एक आईना बन गया, बस देखने की नज़र बदली है। गोडो को समझने में इतना समय नहीं लगा, अपने ही इंतज़ार को पकड़ने में लगा। अब देखिए, ज़िंदगी में अपना कौन सा गोडो अभी भी उस पेड़ के नीचे इंतज़ार करा रहा है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401















