
Talking Mirror
नंदिनी जी, आपने खुद ही लिख दिया है, हेयरकट करा लिया, सजना-सँवरना छोड़ दिया, लाइफस्टाइल बदल ली, और फिर भी कह रही हैं कि विचारों से आज़ाद नहीं हो पा रहीं। यहीं रुककर देखने वाली बात है। बाल कटवाना बाहर का बदलाव है, आसान है, दिख भी जाता है। लेकिन जिस चीज़ को आप ढूंढ रही हैं वह बाहर बदलने से नहीं आती, वह तो इस सवाल से आती है कि मैं यह क्यों कर रही हूँ, किस डर से कर रही हूँ, यही सवाल शिल्पी जी ने अपने आप से पूछे थे। आप किसी और के बदलने का क्रम माँग रह…















