
Talking Mirror
आशा जी, ये जो घर पर दिनभर रहना उबाऊ लगना है, और नेट न होने पर नींद का उड़ जाना, इसको ज़रा गौर से देखिए। ये बेचैनी असल में उबाऊपन नहीं है, ये उस चीज़ की भूख है जो सत्र और पोस्ट्स के ज़रिये मिलती है। अभी ऑफलाइन सत्र लिया भी नहीं और मन पहले से डर रहा है कि उसके बाद क्या होगा, यही दिखा रहा है कि भीतर कुछ है जो पहले से जानता है कि एक बार वो स्वाद लग गया तो लौटना मुश्किल होगा। तो डरने की बजाय इस भूख को सही दिशा दीजिये। नेट न हो तो भी दिन खाली मत रहने…





























