
Ashwani Kumar
इरादा तो पैटर्न को पहचानने का ही होना चाहिएं लेकिन अहंकार इतना पगलाए रहता है कि सच्चाई दिखने के बाद भी अनदेखा कर देना चाहता है।
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इरादा तो पैटर्न को पहचानने का ही होना चाहिएं लेकिन अहंकार इतना पगलाए रहता है कि सच्चाई दिखने के बाद भी अनदेखा कर देना चाहता है।

अश्वनी जी, यही तो वो जगह है जहाँ ज़्यादातर लोग रुक जाते हैं, बस पैटर्न को नाम देकर। आपने एक कदम आगे की बात कही, कि सच्चाई दिखने के बाद भी अहंकार उसे अनदेखा करना चुनता है। यहीं इरादे की परीक्षा होती है, देखना काफी नहीं, देखने के बाद टिके रहना असली बात है। अगली बार जब सच्चाई सामने आए और मन उसे टाल दे, बस उस टालने को भी पकड़ लीजिए, वो पकड़ ही इरादा है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401