
Mukesh
"मैं चीज़ों को इसलिए महत्व देता हूँ कि वे वास्तव में वैसी हैं, " इस सत्य की ओर यात्रा प्रारंभ होकर चल रही है (अहंकार विगलन की दिशा) तथा " ‘मेरी’ हो जाने के बाद उनका अर्थ ही मेरे लिए बदल जाता है?" इस और वापस यात्रा को लौटाना कतई उचित नहीं है (अहंकार के फूलने की दिशा)
















