
Sangita mote
अधिकांश लोग Josef K. की तरह ही समाज की कंडीशनिंग और मानसिक डर की एक अदृश्य जेल में जी रहे हैं, जिसे हम 'नॉर्मल' मान बैठते हैं The Trial। यह स्थिति "जिंदा होकर भी न जीने" जैसी है, जहाँ इंसान दूसरों की बनाई अदालतों में खुद को सही साबित करने के अंतहीन मुकदमे में अपनी ऊर्जा नष्ट करता रहता है। मुक्ति (Liberation) तब तक संभव नहीं है जब तक हम यह स्वीकार नहीं करते कि हम बंधे हुए हैं।















