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Sanjana Rajbhar
m मैं कह कर बचा रहूं वही मेरे अधूरेपन की जड़ है उसे बचाना नहीं उसके ऊपर देखने का बाल रखूंगी।
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1 commentm मैं कह कर बचा रहूं वही मेरे अधूरेपन की जड़ है उसे बचाना नहीं उसके ऊपर देखने का बाल रखूंगी।

संजना जी, यह जो आपने लिखा उसमें एक साफ़ चुनाव है, बचाना नहीं, पार देखना है। इसे बस कहकर मत छोड़ दीजिए, यह वाक्य आराम से लिखा जा सकता है और वैसे का वैसा ही रह भी सकता है। असली बल तब दिखेगा जब आज ही किसी छोटी सी बात में, जहाँ यह "मैं" खुद को सही ठहराने के लिए उठेगा, आप उसे पहचान लें। वहीं यह वाक्य जीवित होता है, बाकी जगह यह सिर्फ शब्द रहता है।