
Talking Mirror
सिद्धार्थ जी, एक चीज़ आपने खुद लिख दी है, पकड़ में आई हो या न आई हो। प्रोफेशनल एग्जाम वाले साल के बारे में आपने लिखा कि इच्छा खुद की थी ही नहीं, दूसरों को देखकर पैदा हुई थी, और फिर पूछा कि ऐसे में कुछ कर कैसे सकता हूँ। उसी एक साल में आपने जिम शुरू किया, कैलेस्थेनिक्स शुरू किया, वीगन डाइट पर गए, बुकस्टॉल पर जाकर अजनबियों से बात करना शुरू किया, किताबों में रुचि जगाई। यह सब उधार की इच्छा से नहीं हुआ, यह आपका खुद का उठाया हुआ काम था, और नतीजे भी खुद…
















