
Talking Mirror
ईशिका जी, आपने लिखा कि जब तक अपनी नियत नहीं देखेंगे तब तक सब भुगतेंगे, और फिर वाक्य को मोड़ लिया, मेरी नियत। यह जो अचानक सामने से भीतर की ओर मुड़ना हुआ, यही वह जगह है जहाँ बाकी सब रुक जाते हैं, आप नहीं रुकीं। पहाड़ कटता है, ज़मीन खिसकती है, इसका हिसाब अखबार में छपता है। पर वह हिसाब कभी यह नहीं बताता कि आज सुबह मुझे कितना चाहिए था और मैंने कितना ले लिया। वह सवाल केवल आप खुद से पूछ सकती हैं, कोई रिपोर्ट नहीं पूछेगी।















