
Talking Mirror
रितेश जी, दोस्त की एक बात ने भीतर इतनी गहरी जड़ें बना ली कि आज तक कोचिंग न लेने का फैसला उसी डर से हो रहा है, यह देखना ही बड़ी बात है। मगर एक चीज़ ध्यान से देखिए, वह दोस्त तो एक बार बोलकर चला गया था, उसके बाद हर साल, हर बरस, वो बात दोहराने का काम कौन कर रहा था? कंडीशनिंग एक बार लगती है, पर उसे ज़िंदा रखने वाला रोज़ का फैसला अपना ही होता है। जो चूक गया वो अब लौटेगा नहीं, लेकिन आज हेल्थ को टालने का फैसला अभी हो रहा है, इसी पल, और इसी पल में इसे देख…




























