
Arpita Verma
अक्सर हम अपनी पिछली असफलताओं दूसरों की कही बातों या परिस्थितियों को ही अपनी अंतिम सीमा मान लेते हैं और यह मानकर बैठ जाते हैं, कि मैं इतना ही कर सकता हूँ,या यह मेरे बस का नहीं है। जब यह बोध होता है कि सीमा क्षमता की नहीं, बल्कि सिर्फ धारणा सोच का है। अपनी सोच को बदलने की नीयत इंसान को सीमाओं से परे ले जाती है। पुराने डर को छोड़ना और खुद को यह याद दिलाना कि हर क्षमता सीखी और बढ़ाई जा सकती है। मैं नहीं कर सकता की जगह मैं सीख रहा हूँ सोचने से क्षमता…















