
Sangita mote
यह मजबुरी हमारे भीतर बैठाअहंकार (Ego) की है, जो स्वभाव से ही अत्यंत अपूर्ण और असुरक्षित है। जिस दिन हम इस बात को गहराई से देख लेंगे यह बदलता हुआ (दृश्य) शरीर नहीं बल्कि उसे देखने वाले दृष्टा है, यह मजबूरी अपने आप गिर जाएगी।
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