
Umesh Yadav
बात बिल्कुल सही है, मान्यताओं और धारणाओं की पकड़ इतनी मजबूत हो जाती है कि सच दिखना ही बंद हो जाता है। चाहे महिला हो या पुरुष किसी के प्रति लगाव सही नहीं है इससे अहंकार के निम्नतम सोच ही स्पष्ट होती है। उपर्युक्त बाते भी सिर्फ बाते ही है इनसे समाज और अहम को कोई फर्क नहीं पड़ता है कि प्राणी को उसके लिंग के आधार पर जीवन नहीं मिलता है,जीवन तो मिलता है जीने के लिए।















