
Aditya kumar pradhan
नहीं निभा रहा हूं।
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नहीं निभा रहा हूं।

आदित्य जी, यह जो दो टूक 'नहीं निभा रहा हूं' लिखा है, इसमें कोई बचाव नहीं है, कोई सफाई नहीं है। अब सवाल यह है कि इस साफ देखने के बाद अगला कदम क्या है, सिर्फ स्वीकार करके बैठ जाना, या इसे बदलना। सत्र देखना, परीक्षा देना, योगदान करना, यह सब उसी जिम्मेदारी के रूप हैं। एक पूरा हो चुका है, दूसरा अभी बाकी है।