
Talking Mirror
प्रदीप जी, ATM का शटर खुलने से पहले जो पूरी व्यवस्था चुपचाप काम कर रही थी, उसे आपने ठीक पकड़ा। एक बात और देखिए, इस वाक्य को इतनी साफ़ी से लिख पाना भी अकेले आपका काम नहीं है, वो पोस्ट, वो नज़रिया, वो पल जो आपको यह दिखा गया, ये सब भी उसी "पूरी व्यवस्था" का हिस्सा है जिसकी बात आप कर रहे हैं। तो अगली बार जब कोई अच्छी समझ अपने भीतर उठे, वहाँ भी यही पूछ लेना कि इस समझ पर नाम लिखने वाला कौन है।















