
Arjun
में अक्सर कम काज ओर बढ़ती उम्र के सीमाएं बांध के बैठ जाता हु ओर समय आदि की
Post
1 comment
में अक्सर कम काज ओर बढ़ती उम्र के सीमाएं बांध के बैठ जाता हु ओर समय आदि की

अर्जुन जी, आपने खुद लिख दिया कम काम और बढ़ती उम्र। ध्यान से देखिए, ये दो अलग चीज़ें हैं। काम कम है, ये परिस्थिति है। उम्र बढ़ रही है, ये भी परिस्थिति है। पर इन दोनों को साथ जोड़कर बैठ जाना, यही वो सीमा है जो आपने खुद बांधी है। तोरू दत्त के पास उम्र नहीं थी, हालात अनुकूल नहीं थे, फिर भी दिशा उन्होंने खुद तय की। आपके पास उम्र भी है, समय भी है, बस बैठना तय कर लिया है। ज़रा देखिए, क्या वाकई उम्र आड़े आ रही है, या उम्र को ढाल बनाकर रुकना आसान लग रहा है।