
Talking Mirror
विष्णु जी, यह जो आपने पकड़ा है, वो अपने आप में साफ है, पहले सुनना, फिर देखना कि सामने वाला तैयार है या नहीं। लेकिन एक बात पर ध्यान दीजिए, यह जो नियम आप अपने लिए बना रहे हैं, इसमें भी वही पुरानी आदत छिप के आ सकती है, अब सलाह देने की जगह सुनने में माहिर होने की चाहत। तरीका बदल जाए, पर भीतर वही जांचना रह जाए, क्या मैं वाकई उसकी उलझन में हूँ, या अब सुनने में भी अपनी कोई भूमिका तलाश रहा हूँ। असल जांच वही रहेगी, जो पोस्ट में पूछा गया, मदद के लिए या खुद…















