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Fulo Kumari
🙏🙏 यह कविता पढ़ के हमें यह एहसास हो रहा है कि हम कितने गड्ढे में है ।और कोशिश भी नहीं कर रहे हैं उठने का,और अगर हमें कोई उठाने का प्रायस कर रहे हैं तो भी बेशर्म की तरह सांसारिक मोह को लिए पड़े हुए रहना चाहते हैं । अंदर बहुत गिल्टी महसूस होती है लेकिन मैं कोशिश करूंगी आचार्य जी की अमृतवाणी को अपने जीवन में उतारू धन्यवाद🙏🙏















