
asha meena
समय, माहौल और परिस्थितियां बदलते ही हमारी पसंद भी बदल जाती है हमारा चुनाव भी बदल जाता है क्योंकि वो चुनाव विवेक से नहीं होता है , इसमें हमारा भीतरी कुछ नहीं होता है और आचार्य जी हमें इस भीतरी चुनाव को जानना ही सिखाते है आचार्य जी को सुनकर हमें असल चुनाव को जानने और उस ओर अग्रसर होने की समझ और हिम्मत मिलती है, हमारा विवेकपूर्ण चुनाव क्या है और हम किसे चुन रहे है, हमारी भीतरी पसन्द क्या है आचार्य जी को सुनकर ये परिभाषित होता है। धन्यवाद आचार्य जी…















