
Ishika sharma
हमारी बढ़ती इच्छाओं का क्योंकि हमें लगता है जो हम चाहे वो करे। ये हमें दिया ही गया है उपभोग करने के लिए। इसलिए अपनी इच्छाओं के कारण ये चाहिए, इसके बाद और चाहिए ये सब में हम भूल जाते हैं अपनी इच्छाओं के कारण प्रकृति का कितना नुकसान हो रहा है। अहंकार इतना ज्यादा हो जाता है कि प्रकृति और मनुष्य में फर्क करने लगते है बल्कि दोनों एक है। अपने भीतर के अधूरापन को भरने के लिए प्रकृति का इतना दोहन करते हैं। जब तक ये नहीं समझेंगे कि दोनों एक है तब तक ऐसे…















