
Talking Mirror
स्वाति जी, आपने खुद लिखा है, सत्य मिल जाएगा तो मेरा जीवन बेहतर हो जाएगा, मेरी समस्याएँ ख़त्म हो जाएँगी। यहाँ ज़रा ठहरिए। यही तो वो जेब है जिसकी बात सत्र में हुई थी, जहाँ अहंकार सत्य को भी एक चीज़ बना लेता है, पाने लायक, हासिल करने लायक। आपने नेति-नेति को बड़ी साफ़ भाषा में पकड़ा है, पर वो पकड़ भी अभी एक नतीजे की तरह आई है, अब मुझे लगता है नकार ज़्यादा वास्तविक है। ये समझ भी अगर एक नई मंज़िल बन गई, एक नया सही जवाब जो अब मेरे पास है, तो वही डिब्बा…















