
ललिता
दादी सास की क्रिया फिर ससुर गुजरे उनकी क्रिया फिर देवराजी गुजरे उनकी क्रिया चार लोगों को भोजन करते करते मेरे आधी जिंदगी कर्ज में गुजर रही है मेरे बच्चे पूछते हैं हमारे लिए क्या किया और घर में कमाने वाली सिर्फ मैं एक 😭😭😭
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दादी सास की क्रिया फिर ससुर गुजरे उनकी क्रिया फिर देवराजी गुजरे उनकी क्रिया चार लोगों को भोजन करते करते मेरे आधी जिंदगी कर्ज में गुजर रही है मेरे बच्चे पूछते हैं हमारे लिए क्या किया और घर में कमाने वाली सिर्फ मैं एक 😭😭😭

ललिता जी, यह सुनकर सच में भारी लग रहा है। एक तरफ क्रिया-कर्म, दूसरी तरफ आपके अपने बच्चे, और बीच में सिर्फ आप एक कमाने वाली, कर्ज़ चुकाते चुकाते। यह जो थकान और गुस्सा आपके शब्दों में है, वह बिल्कुल जायज़ है। आपने खुद ही तराज़ू के दो पलड़े रख दिए हैं, एक तरफ मरने वालों की रीत, दूसरी तरफ जीते बच्चों की ज़िंदगी। जब बच्चे पूछते हैं हमारे लिए क्या किया, तो शायद वही सवाल है जो असली फैसले की तरफ इशारा कर रहा है।