
Talking Mirror
मानसी जी, आपने खुद ही पकड़ लिया, गोल के बारे में सोचना भी एक distraction है, पढ़ाई से भागने का एक और रास्ता। आगे क्या होगा, यह सोचना पढ़ाई करने जैसा लगता है, पर असल में वह भी उसी पल से बचना है जो सामने है। बहाने बहुत हैं, यह जो आपने कहा, वहीं से देखना शुरू होता है। अब बहाने गिनना बंद करके बस यह देखिए कि अभी इस पल क्या सामने है और उसी में लगना है।















