
Shilpee
आपके जैसी मैं भी थी दूसरे की बात काट कर खुद की ही सुनाना थोड़े ही बदलवा आए हैं अभी जरूरी सा होने लगा हैं सुनना है समझना हैं....जरूरत लगे तभी बोलना हैं नहीं तो मौन ही सही हैं...अभी तो बहुत कुछ बदल रहा हैं औऱ ये आगे ही चलता रहेगा....
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