
Vimla Patel
वास्तविकता यहीं है कि हम जरूरत से ज्यादा उपभोग कर रहे है और ऐसे हम अपनी जरूरत के स्तर पर मापेंगे तो पाएंगे कि 80-90% समान बस अपनी कामनाओं के वशीभूत होकर लिया गया है , जो अगर न हो तो भी जीवन जिया जा सकता हैं, तो यह बात तो साफ है कि जरूरत प्रकृति को नुकसान भी पहुंचा सकती , अंदर के अधूरेपन को पूर्ण करने की इच्छा और अधिक उपभोग की प्रवृति ही प्रकृति का विनाश कर रही है।















