
Isha
हम अपनी सीमाओं से नहीं बंधे हैं बल्कि उस मैं से जो उन्हें बदलने से डरता है। किसी भी क्षेत्र में कुछ नया प्रयोग या किसी भी कार्य को नए ढंग से करने से पहले बहुत प्रश्न मन में जागृत होते हैं कि मेरे आस पास वाले मेरे बारे में क्या सोचेंगे कि मैने उनकी परंपरा का पालन नहीं किया। कहीं वो मेरे प्रयोग को विरोध की तरह तो नहीं लेंगे और फिर मेरी उस छवि का क्या जो हमेशा सामाजिक स्वीकृतियों के पीछे ही भागती रही है















