
Seema
नहीं, क्योंकि बहुत बार हम कोई काम इसलिए भी कर रहे होते हैं ताकि दूसरे उसे देखकर हमारी तारीफ़ करें। हम उसमें मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन कहीं न कहीं यह डर भी रहता है कि इसका श्रेय कोई और न ले ले। यह बात बिल्कुल सही है। लेकिन अब सच कहूँ तो धीरे-धीरे यह समझ आने लगी है कि मेरा जो काम है, मुझे उसे पूरी ईमानदारी से करना है। फिर चाहे कोई दूसरा आगे आकर यह कह दे कि इसमें मेरा भी योगदान है। ऐसा होने पर थोड़ा बुरा तो लगेगा, लेकिन अब उस भाव में पहले जैसी…















